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आर टीआई कानून का खुला उलंघन – अपीलीय अधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद भी नहीं दी गई जानकारी

आर टीआई कानून का खुला उलंघन – अपीलीय अधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद भी नहीं दी गई जानकारी

∆ लखनपुर से रिपोर्टर मुन्ना पांडेय की रिपोर्ट

आम-जनता को सूचना के अधिकार पारदर्शिता अधिनियम के तहत किसी भी सरकारी दफ्तर संस्था अथवा पंचायतों से योजनाओं आय व्यय तथा अन्य खास जानकारी प्राप्त करने समूचे देश में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू किया गया है। लेकिन इस नियम का शत-प्रतिशत पालन नहीं हो रहा है।

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ऐसा ही मामला सरगुजा जिले के जनपद पंचायत लखनपुर के तहत ग्राम पंचायत लब्जी और और ग्राम पर्री का सामने आया है। जहा आवेदक मुन्ना पांडेय लखनपुर ने बाकायदा डाक द्वारा आवेदन पत्र भेजकर सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2020 से दिसम्बर, 2024 तक मूलभूत योजना से पंचायत को प्राप्त राशि उसका व्यय कार्यवार व्हाउचर, कैश बुक, ग्रामसभा प्रस्ताव पजी की छायाप्रति, अन्य सम्बंधित अभिलेख की सत्यापित प्रति जानकारी में मांगी गई थी। लेकिन दोनों पंचायतों के जन सूचना अधिकारीयों द्वारा नियत समय 30 दिवस के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। आवेदक द्वारा अपीलीय अधिकारी मु.कार्य.अधि. वेद प्रकाश पांडेय के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत करते हुये निशुल्क जानकारी उपलब्ध कराये जाने हेतु मांग की गई। अपील सुनवाई के बाद सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 नियम के विरुद्ध जन सूचना अधिकारी (ग्राम सचिव) जगदीश तिर्की एवं धनसाय राजवाड़े द्वारा 15 दिवस के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
जबकि अपीलीय अधिकारी वेदप्रकाश पांडेय के समक्ष सुनवाई में जनसूचना अधिकारीयों ने 15 दिवस के भीतर चाही गई जानकारी देने कहा था। लेकिन दोनों पंचायतों से जानकारी नहीं मिली।
अपीलीय अधिकारी के आदेश का अवमानना करते हुए दोनों पंचायतों के जनसूचना अधिकारीयों द्वारा आज दिनांक तक कोई जानकारी नहीं दिया है। जनसूचना अधिकारीयों के द्वारा जानकारी नहीं देना समझ से परे है ! अपीलीय अधिकारी वेदप्रकाश पांडेय ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए जानकारी देने हेतु आदेश जारी कर दिया है।
ऐसे हालत में आवेदक के पास राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील किये जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है। जनसूचना अधिकारी इतने लापरवाह हो गए हैं, कि राज्य सूचना आयोग के मुख्य आयुक्त द्वारा नोटिस देकर कलेक्टर कार्यालय में विडियो कांफ्रेंसिंग पर बुलाये जाने पर नहीं पहुंचते। देखने वाली बात होगी, कि आयोग के समक्ष अपील आवेदन पेश करने के बाद उक्त दोनों पंचायतों के विरुद्ध क्या नतीजा सामने आता है।
यदि शासन प्रशासन स्तर से सूचना के अधिकार नियम का कड़ाई से पालन करते हुये ग्राम पंचायत लब्जी और ग्राम पंचायत पर्री के मूलभूत योजना तथा दूसरे योजना राशि व्यय की सुक्ष्म व निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई खुद ही सामने आ जायेगा। पंचायत में हुये भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है, ऐसा आवेदक का मानना है !

 

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