

रमज़ान आदेश विवाद पर स्पष्टता, जवाबदेही एवं क्षमायाचना की मांग : रशीद अहमद अंसारी
अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़) पवित्र माह रमजान के दौरान शासकीय मुस्लिम कर्मचारियों को ड्यूटी समय समाप्ति से एक घंटे पूर्व अवकाश दिए जाने संबंधी कथित आदेश को लेकर प्रदेश में सियासत गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और अब इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की भी मांग उठने लगी है।

ज़िला कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के सरगुजा जिलाध्यक्ष जनाब रशीद अहमद अंसारी ने इस मामले में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। रशीद अहमद जी का कहना है, कि 19 फरवरी को वक्फ बोर्ड की ओर से जारी एक पत्र में रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटे पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति शासन द्वारा दिए जाने का उल्लेख किया गया था। यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में रशीद अहमद अंसारी ने कहा है, कि रमज़ान माह जैसे पाक और बरकतों भरे समय में जारी कथित आदेश को लेकर प्रदेश में जो भ्रम और विरोधाभास की स्थिति बनी है, उससे रोज़ेदारों की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है। एक ओर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सलीम राज द्वारा जारी पत्र में रमज़ान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पूर्व कार्यालय छोड़ने की अनुमति शासन द्वारा दिए जाने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर राज्य शासन के आधिकारिक विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

इन परस्पर विरोधी बयानों ने अल्पसंख्यक समाज विशेषकर छत्तीसगढ़ के मुस्लिम समुदाय को गहरी पीड़ा और असमंजस में डाल दिया है। पवित्र रमज़ान में इस प्रकार की भ्रामक जानकारी का प्रसार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, कि जनता को सच जानने का पूरा अधिकार है। यदि किसी स्तर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के आदेश जारी किया गया या भ्रामक सूचना प्रसारित हुई, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।

साथ ही उन्होंने जनाब सलीम राज जी को सलाह देते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार का आदेश या पत्र जारी करने से पूर्व पूरी तरह विचार-विमर्श एवं आधिकारिक पुष्टि कर लें, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा, कि इस पाक महीने में जो स्थिति बनी है, वह अत्यंत खेदजनक है। यदि इस प्रकरण में कोई त्रुटि हुई है, तो संबंधित पक्ष को मुस्लिम समाज से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए, ताकि विश्वास और पारदर्शिता कायम रह सके।

संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार संवाद जरूरी
उन्होंने कहा कि रमजान जैसे धार्मिक और संवेदनशील विषयों से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक, प्रमाणिक और जिम्मेदार जानकारी ही जारी की जानी चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा न हो। अंत में उन्होंने वक्फ बोर्ड अध्यक्ष से पद की गरिमा बनाए रखते हुए स्पष्ट और अधिकृत जानकारी जारी करने की अपील के साथ उन्होंने मांग की है कि –

1. पूरे मामले पर स्पष्ट और लिखित स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
2. जिम्मेदारी तय कर उचित कदम उठाए जाएँ।
3. भविष्य में ऐसे संवेदनशील विषयों पर विशेष सावधानी और पारदर्शिता बरती जाए।
रमज़ान अमन, सब्र और भाईचारे का पैग़ाम देता है उम्मीद है कि सभी संबंधित पक्ष इस पवित्र माह की भावना का सम्मान करते हुए स्थिति को स्पष्ट करेंगे और समाज के विश्वास को पुनः स्थापित करेंगे।

जिलाध्यक्ष जनाब रशीद अहमद अंसारी जी ने कहा, कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है, कि इस मामले में सही जानकारी कौन दे रहा है – वक्फ बोर्ड या शासन का अधिकृत विभाग ? यदि किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई है तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आवश्यक होने पर सार्वजनिक माफी की भी मांग की।
वक्फ बोर्ड की भूमिका सवालों के घेरे में
ज़िला कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग सरगुजा के जिलाध्यक्ष ने कहा, कि वक्फ बोर्ड की मूल जिम्मेदारी वक्फ संपत्तियों की निगरानी, संबंधित समितियों का पंजीयन, मुतवल्ली चुनाव की प्रक्रिया तथा अतिक्रमण संबंधी मामलों में प्रशासन को अवगत कराना है। उन्होंने आरोप लगाया, कि हाल के समय में बोर्ड की ओर से ऐसे आदेश या पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिनसे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
नए वक्फ कानून पर भी स्पष्टता की मांग
रशीद अहमद अंसारी जी ने यह भी कहा, कि यदि नए वक्फ कानून को समुदाय के हित में बताया जा रहा है, तो पुराने और नए प्रावधानों के बीच अंतर तथा उससे मिलने वाले वास्तविक लाभों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पारदर्शिता ही किसी भी निर्णय को विश्वसनीय बनाती है।





