
GDP 7.8% बढ़ा तो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज क्यों? मोदी सरकार जवाब दे : परवेज गांधी
अंबिकापुर। केंद्र सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि के दावे के बीच कांग्रेस नेता एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के महासचिव परवेज आलम गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि यदि देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है और विकास का लाभ आम जनता तक पहुंच रहा है, तो आज भी देश की करीब 80 करोड़ आबादी को मुफ्त अनाज की आवश्यकता क्यों पड़ रही है ?

परवेज गांधी ने कहा कि सरकार GDP के आंकड़ों को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, लेकिन आम आदमी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि अपनी जेब, रोजगार, रसोई के बढ़ते खर्च और परिवार की जरूरतों से करता है। सरकार को GDP वृद्धि का आंकड़ा बताने के साथ यह भी बताना चाहिए कि इस आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक कितना पहुंचा है।

उन्होंने कहा कि GDP बढ़ना और आम लोगों की जिंदगी बेहतर होना एक ही बात नहीं है। अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ सकता है, लेकिन यदि करोड़ों परिवार महंगाई, बेरोजगारी, कम आय और बढ़ते घरेलू खर्च से जूझ रहे हैं, तो केवल GDP के आंकड़े दिखाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
‘विकास का 7.8 प्रतिशत आम आदमी की जिंदगी में कहां दिखाई देता है?’
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश का युवा रोजगार की तलाश में भटक रहा है, किसान बढ़ती लागत से परेशान है और मजदूर अपनी सीमित मजदूरी में परिवार का खर्च चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में यह सवाल पूरी तरह जायज है कि जिस 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का सरकार जश्न मना रही है, उसका असर आम नागरिक के जीवन में आखिर कहां दिखाई दे रहा है ?
उन्होंने कहा कि देश के वास्तविक आर्थिक विकास के लिए खेती से अतिरिक्त श्रम को आधुनिक उद्योग, विनिर्माण और सम्मानजनक रोजगार की ओर ले जाना जरूरी है। इसके लिए विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना होगा। ‘मेक इन इंडिया’ जैसे बड़े दावों के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होना सरकार के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘महंगाई आय बढ़ने का फायदा भी निगल रही है’
परवेज गांधी ने कहा कि केवल आय बढ़ने से आर्थिक खुशहाली नहीं आती। यदि महंगाई बढ़ी हुई आय को ही निगल जाए तो कागज पर आर्थिक विकास और परिवार की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर बना रहता है। आम जनता के लिए GDP के प्रतिशत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि रसोई का खर्च कितना है, बच्चों की पढ़ाई का खर्च कैसे चलेगा, इलाज का खर्च कौन उठाएगा, रोजगार मिलेगा या नहीं और भविष्य के लिए कितनी बचत हो पाएगी।
उन्होंने कहा, “यशवंत सिन्हा जी को वर्ष 2004 में हजारीबाग में जनता ने सवाल किया था कि हम GDP को खाएंगे क्या? आज इतने वर्षों बाद भी जनता का सवाल वही है। उसे आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बेहतर जिंदगी चाहिए।”
‘ग्राफ ऊपर और गरीब की थाली नीचे—इसे विकास नहीं कह सकते’
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश को ऐसा विकास चाहिए जिसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। “विकास वह नहीं है जिसमें ग्राफ ऊपर जाता रहे और गरीब की थाली नीचे रह जाए। विकास तब माना जाएगा जब हर युवा को रोजगार, हर परिवार को सम्मानजनक आय और आम आदमी को महंगाई से राहत मिले।”
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि GDP वृद्धि के आंकड़ों के साथ-साथ रोजगार, वास्तविक आय, महंगाई और आर्थिक असमानता की स्थिति पर भी स्पष्ट और विस्तृत आंकड़े जनता के सामने रखे जाएं।
परवेज आलम गांधी ने कहा कि “जनता को आंकड़ों की मिठाई नहीं, रोजगार और सम्मानजनक आय चाहिए। सिर्फ GDP बढ़ने से भारत विकसित नहीं होगा। जब तक आर्थिक विकास आम भारतीय की जिंदगी में दिखाई नहीं देगा, तब तक विकास का दावा अधूरा रहेगा।”




