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सद्भावना ग्राम तकिया: सरगुजा की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक एकता की मिसाल

सद्भावना ग्राम तकिया: सरगुजा की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक एकता की मिसाल

अंबिकापुर। सरगुजा की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल सद्भावना ग्राम तकिया आज भी लोगों की साझा आस्था और भाईचारे का केंद्र बना हुआ है। यहां बाबा मुरादशाह, बाबा मोहम्मद शाह और उनके पक्षी तोता की मजार पर विभिन्न धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ माथा टेकते हैं। वहीं, समीप स्थित नकट्टी देवी मंदिर में भी लोग वर्षों से अपनी आस्था रखते आ रहे हैं।

इस धार्मिक स्थल की खासियत यह है कि नकट्टी देवी मंदिर की व्यवस्था भी अंजुमन कमेटी द्वारा देखी जाती है, जबकि मंदिर के पुजारी कोरवा बैगा समाज से आते हैं। यह व्यवस्था अपने आप में सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने कहा कि तकिया क्षेत्र में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। कुछ लोग समय-समय पर शहर और क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहज़ीब तथा सांप्रदायिक एकता की भावना को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन सद्भावना ग्राम तकिया की वर्षों पुरानी परंपरा ऐसे प्रयासों का जवाब देती है।

उन्होंने कहा कि इस आस्था स्थल पर सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं और सभी की भावनाएं इससे जुड़ी हैं। सरगुजा के पूर्व कलेक्टर प्रवीण कृष्ण ने भी क्षेत्र की इसी विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को देखते हुए इसका नामकरण ‘सद्भावना ग्राम तकिया’ किया था।

परवेज आलम गांधी ने लोगों से अपील की कि सरगुजा की सांप्रदायिक एकता, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत बनाए रखने में सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। सद्भावना ग्राम तकिया की परंपरा सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश देती रहे, यही सरगुजा की पहचान है।

 

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