झीरम घाटी पर कांग्रेस का बड़ा हमला: “NIA ने साजिश नहीं खोजी, सच को दबाया”; 13 साल बाद भी अनसुलझे सवालों पर सरकार को घेरा
NIA कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने बताया ‘आधा-अधूरा न्याय’, जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक बोले—जांच का दायरा छोटे नक्सलियों तक सीमित क्यों रहा ? बड़े नामों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?


झीरम घाटी पर कांग्रेस का बड़ा हमला: “NIA ने साजिश नहीं खोजी, सच को दबाया”; 13 साल बाद भी अनसुलझे सवालों पर सरकार को घेरा
अंबिकापुर, 6 सितंबर। झीरम घाटी हमले के 13 वर्ष बाद NIA कोर्ट के फैसले को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने रविवार को राजीव भवन में प्रेसवार्ता कर NIA की जांच पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि जब जांच ही अधूरी और दिशाहीन होगी, तो उसके आधार पर सामने आने वाला परिणाम भी कई अनुत्तरित सवाल छोड़ जाएगा।
कांग्रेस ने NIA पर आरोप लगाया कि झीरम घाटी जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले की जांच को सीमित दायरे में रखा गया और हमले के पीछे के कथित बड़े षड्यंत्र तथा प्रभावशाली नक्सली नेतृत्व की भूमिका को पूरी तरह सामने लाने का प्रयास नहीं किया गया।
‘बड़े नक्सली नेताओं तक क्यों नहीं पहुंची जांच?’
कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने सवाल उठाया कि जब बड़े नक्सली नेताओं की गिरफ्तारी और समर्पण हुआ, तो उनके खिलाफ इस मामले में चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की गई ? उनसे पूछताछ कर हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने आरोप लगाया कि NIA ने जांच को छोटे स्तर के नक्सलियों तक सीमित रखा। कांग्रेस का दावा है कि घटना के घायलों और रिपोर्टकर्ता तक के बयान दर्ज नहीं किए गए।
श्री पाठक ने कहा कि परिवर्तन यात्रा के संयोजक रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने NIA को ऐसे कई साक्ष्य दिए थे, जो कथित षड्यंत्र की दिशा में संकेत करते थे। इसके बावजूद इन पहलुओं की जांच किस स्तर तक हुई, यह आज भी बड़ा सवाल है।

सुरक्षा चूक से लेकर रूट बदलने तक—कांग्रेस ने पूछे सवाल
कांग्रेस ने प्रेसवार्ता में परिवर्तन यात्रा के सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठाए। पाठक ने कहा कि टी.एस. सिंहदेव ने पार्टी हाईकमान को बताया था कि जिस मार्ग से परिवर्तन यात्रा गुजर रही थी, वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
कांग्रेस का आरोप है कि बाद में यह बात सामने लाई गई कि जिला प्रशासन की जानकारी के बिना अंतिम समय में यात्रा का रूट बदला गया था। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताते हुए सवाल किया कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक और रूट परिवर्तन की वास्तविकता क्या थी?
‘SIT जांच को रोकने के बाद अब सरकार खामोश क्यों ?’
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जे.पी. श्रीवास्तव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में झीरम मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि NIA ने इस जांच में बाधा पहुंचाई और न्यायालय से स्टे हासिल किया।
श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद SIT को जांच करने का रास्ता मिलने के बावजूद राज्य सरकार पिछले ढाई वर्षों से इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो मामले की आगे की जांच को लेकर स्पष्ट कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
गणपति और रमन्ना के नाम पर भी कांग्रेस ने घेरा NIA को
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन NIA की विवेचना पर सवाल उठाना जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि FIR में नामजद प्रमुख नक्सली कमांडरों गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस ने पूछा कि जिन लोगों की भूमिका की जांच जरूरी थी, उन तक जांच की कड़ी क्यों नहीं पहुंची ?
शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में है।
‘13 साल बाद भी असली सवाल वहीं खड़े हैं’
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि 13 वर्ष बाद आया फैसला इसलिए निराशाजनक है क्योंकि कांग्रेस के अनुसार जांच ने दोषियों और पूरे षड्यंत्र को सामने लाने की बजाय कई सवाल अनुत्तरित छोड़ दिए।
उन्होंने भाजपा शासन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झीरम घाटी घटना की जांच में कथित लीपापोती के कारण यह संदेह और गहरा होता है कि घटना के पीछे के सभी पहलुओं को सामने नहीं आने दिया गया।
कांग्रेस के सवाल—जवाब कौन देगा ?
प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम घाटी केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की बेहद दर्दनाक घटना है। इसलिए जांच केवल कुछ आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमले की पूरी साजिश, सुरक्षा में हुई कथित चूक, रूट परिवर्तन और सभी संबंधित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि न्याय की लड़ाई को आगे ले जाएगी।
इस दौरान 20 सूत्रीय कार्यक्रम के पूर्व उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, हेमंत सिन्हा, मो. इस्लाम, इंद्रजीत सिंह धंजल, नुरुल अमीन सिद्दीकी, लोकेश कुमार, जमील खान, नरेंद्र विश्वकर्मा, दिनेश शर्मा, आशीष जायसवाल, अविनाश कुमार, विकास शर्मा सहित कांग्रेस के अनेक नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
संचार विभाग : जिला कांग्रेस कमेटी, सरगुजा (अम्बिकापुर)




