

झीरम घाटी मामले में NIA की जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा—‘फैसला आधा-अधूरा न्याय’
अंबिकापुर, 6 सितंबर। झीरम घाटी हमले के 13 वर्ष बाद NIA कोर्ट के आए फैसले को कांग्रेस ने ‘आधा-अधूरा न्याय’ बताते हुए जांच एजेंसी NIA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर रविवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में आयोजित प्रेसवार्ता के क्रम में सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा राजीव भवन में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई।

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने आरोप लगाया कि NIA ने शुरुआत से ही झीरम घाटी मामले की जांच को एक सीमित दायरे में रखा। उन्होंने कहा कि घटना में कथित रूप से शामिल बड़े नक्सली नेताओं की गिरफ्तारी और समर्पण के बावजूद उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल नहीं की गई और न ही उनसे पूछताछ कर हमले के पीछे के कथित राजनीतिक षड्यंत्र को सामने लाने का प्रयास किया गया।
पाठक ने कहा कि परिवर्तन यात्रा के संयोजक रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने NIA को कई ऐसे साक्ष्य उपलब्ध कराए थे, जो घटना में षड्यंत्र की ओर इशारा करते थे। कांग्रेस का आरोप है कि घटना में घायल लोगों और रिपोर्टकर्ता तक के बयान NIA द्वारा दर्ज नहीं किए गए।
उन्होंने कहा कि टी.एस. सिंहदेव ने पार्टी हाईकमान को बताया था कि परिवर्तन यात्रा जिस मार्ग से गुजर रही थी, वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सुरक्षा में हुई कथित चूक पर पर्दा डालने के लिए यात्रा का मार्ग अंतिम समय में बदले जाने की बात प्रचारित की गई।
‘SIT जांच में NIA ने डाला था रोड़ा’
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जे.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में झीरम मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया था, लेकिन NIA द्वारा इस जांच में हस्तक्षेप करते हुए न्यायालय से स्टे हासिल किया गया था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद SIT को जांच करने का रास्ता साफ होने के बावजूद राज्य की भाजपा सरकार पिछले ढाई वर्षों से इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
‘NIA की विवेचना जैसी रही, वैसा ही आया फैसला’
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन सवाल NIA की जांच को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि NIA ने मामले की तह तक जाकर जांच नहीं की, जिसके कारण हमले में शामिल प्रमुख नक्सली और कथित अन्य षड्यंत्रकर्ता बच निकले।
उन्होंने कहा कि FIR में नामजद प्रमुख नक्सली कमांडरों गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाए जाने को लेकर भी NIA की जांच पर सवाल खड़े होते हैं। शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने से पीछे नहीं हटेगी।
‘दोषियों से ज्यादा छुपाया गया’
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि 13 वर्ष बाद आया फैसला इस दृष्टि से निराशाजनक है कि जांच करने वाली NIA ने अपनी विवेचना में दोषियों को सामने लाने से ज्यादा तथ्यों को छुपाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान इस घटना को लेकर की गई कथित लीपापोती कई सवाल खड़े करती है।
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने झीरम घाटी हमले की व्यापक और निष्पक्ष जांच, कथित बड़े षड्यंत्रकारियों को सामने लाने तथा घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की मांग की।
इस अवसर पर 20 सूत्रीय कार्यक्रम के पूर्व उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, हेमंत सिन्हा, मो. इस्लाम, इंद्रजीत सिंह धंजल, नुरुल अमीन सिद्दीकी, लोकेश कुमार, जमील खान, नरेंद्र विश्वकर्मा, दिनेश शर्मा, आशीष जायसवाल, अविनाश कुमार, विकास शर्मा सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संचार विभाग : जिला कांग्रेस कमेटी, सरगुजा (अम्बिकापुर)




