
“मेरे फूल से बेटे को किस बात की सजा दी ?” 56 साल का पिता के कंधे पर 30 वर्षीय जवान बेटे का जनाजा, मां का रो-रोकर बुरा हाल
गोण्डा (उत्तर प्रदेश)। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि जिस बेटे को उसने अपनी आंखों के सामने बड़ा किया, उसी जवान बेटे का जनाजा उसे अपने कंधों पर उठाना पड़े। 56 वर्षीय पिता जब अपने 30 साल के बेटे का जनाजा उठाने को मजबूर हुआ तो पूरे परिवार में मातम पसर गया। बेटे की मौत के गम में मां, पिता, भाई-बहन, चाचा-चाची और फुफियों समेत पूरा परिवार सदमे में है।

बेटे को खोने का दर्द पिता के शब्दों में साफ झलकता है। गमजदा पिता ने कहा, “मेरे फूल से बेटे को किस बात की सजा दी? 56 साल का बाप 30 साल के जवान बेटे का जनाजा उठा रहा है। अल्लाह, ये कैसा इंसाफ है?”

पिता ने बताया कि बेटे सरफराज हुसैन की जिंदगी बचाने के लिए उन्होंने दिल से दुआ मांगी थी। उनकी इच्छा थी कि बेटे की जान के बदले उनकी जान ले ली जाए, लेकिन उनके बेटे को कुछ न हो। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।
उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, “मैंने दुआ मांगी थी कि सरफराज हुसैन की जान के बदले मेरी जान ले ले, मगर मेरे बेटे को कुछ नहीं होना चाहिए। आज समझ में आया कि मुसीबत में कोई दुआ काम नहीं आती है।”
सबसे ज्यादा मार्मिक स्थिति उस मां की है, जो अपने बेटे के ठीक होकर लौटने की उम्मीद में लगातार इंतजार करती रही। परिवार के मुताबिक, मां बेटे के सही होने की आस लगाए बैठी थी, लेकिन जब बेटे की मौत की खबर सामने आई तो उसका दुख संभालना मुश्किल हो गया। परिजनों का कहना है कि बेटे की मौत के सदमे ने मां को पूरी तरह तोड़ दिया है।
परिवार ने कहा कि सरफराज अभी महज 30 वर्ष का था और जिंदगी को पूरी तरह जी भी नहीं पाया था। उसकी मौत ने परिवार के कई रिश्तों को गहरे सदमे में डाल दिया। एक मां और पिता के साथ-साथ उसके दो चाचा, दो चाची, तीन फुफियां, दो बहनें, फुफेरे-चचेरे भाई और एक भाई भी इस असहनीय दुख से गुजर रहे हैं।
गम में डूबे पिता ने अपने दर्द को शब्दों में बयां करते हुए कहा कि उनका फूल जैसा बच्चा उन्हें और पूरे परिवार को रोता छोड़कर चला गया। उन्होंने भावुक होकर कहा, “एक मां, जो पागलों की तरह अपने बेटे के सही होने का इंतजार करती रही, आज होश खोकर पड़ी है। ऐ मालिक, तेरा ये कैसा इंसाफ है?”
सरफराज की मौत ने परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी। एक पिता के कंधे पर जवान बेटे का जनाजा और मां की आंखों में बेटे के लौट आने की अधूरी उम्मीद—यह दृश्य पूरे परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है।




