
रहिमन, पानी रोकिये ! भारी बारिश ने खोली स्मार्ट शहरों की पोल, ड्रेनेज से लेकर शहरी नियोजन तक उठे गंभीर सवाल
बिलासपुर। वर्ष 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी और तीव्र बारिश ने महानगरों से लेकर स्मार्ट सिटी तक की शहरी व्यवस्था की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, सूरत, हैदराबाद, गुरुग्राम, लखनऊ, रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में जलभराव, यातायात बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की घटनाओं ने शहरी बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्मार्ट सिटीज मिशन में बड़े पैमाने पर निवेश के बावजूद कई शहरों में मूलभूत ड्रेनेज और जलनिकासी की समस्याएं बनी हुई हैं।
लेखक राजेंद्र रंजन गायकवाड ने अपने लेख “रहिमन, पानी रोकिये!” में कहा है कि समस्या केवल बारिश की मात्रा तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक तीव्र वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि कई शहरों की जलनिकासी व्यवस्था पुरानी क्षमता और पुराने शहरी मानकों के आधार पर बनी हुई है। अनियोजित शहरीकरण, झीलों और प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण, बढ़ता कंक्रीटीकरण, नालों में कचरा तथा नियमित रखरखाव की कमी शहरी जलभराव को और गंभीर बना रहे हैं।
फ्लड हॉटस्पॉट की पहचान और नियमित सफाई जरूरी
गायकवाड के अनुसार शहरों को आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी करनी होगी। प्रत्येक नगर निगम को फ्लड हॉटस्पॉट की मैपिंग, मानसून से पहले नालों की नियमित सफाई और डीसिल्टिंग को अनिवार्य करना चाहिए। कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि केवल कागजी रिपोर्ट तैयार न हो।
उन्होंने अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि मौसम विभाग के साथ हाइपरलोकल फोरकास्टिंग, IoT सेंसर और AI आधारित तकनीक के जरिए संभावित जलभराव की पूर्व चेतावनी दी जा सकती है। पंपिंग स्टेशन, बैकअप पावर और आपातकालीन राहत दलों को पहले से तैयार रखना होगा। निचले इलाकों के लिए पूर्व-स्थानांतरण की स्पष्ट योजना भी बनाई जानी चाहिए।
‘स्पंज सिटी’ मॉडल से पानी रोकने पर जोर
लेख में स्टॉर्मवाटर ड्रेनेज की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ‘स्पंज सिटी’ की अवधारणा अपनाने की जरूरत बताई गई है। शहरों में केवल बारिश का पानी तेजी से बाहर निकालने के बजाय उसे रोकने, संग्रहित करने और धीरे-धीरे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।

झीलों और वेटलैंड्स का पुनर्जीवन, बायो-रिटेंशन पार्क, पानी सोखने वाले पेवमेंट, डिटेंशन एवं इनफिल्ट्रेशन टैंक तथा प्रभावी रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपायों को शहरी विकास का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नए निर्माण में अनावश्यक कंक्रीटीकरण कम कर ग्रीन स्पेस और खुले भू-भाग को बढ़ावा देने की जरूरत है।
प्राकृतिक जलमार्गों और बाढ़ क्षेत्रों में निर्माण पर रोक
गायकवाड ने मास्टर प्लान में बाढ़ जोखिम को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई है। प्राकृतिक ड्रेनेज लाइन और बाढ़ के मैदानों में निर्माण पर प्रभावी रोक, पर्यावरणीय निर्देशों का पालन तथा शहरी निकायों को पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार देने की जरूरत है।
AMRUT, Smart Cities और Urban Flood Risk Management Programme जैसी योजनाओं के संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के साथ रखरखाव के लिए स्थायी बजट का समय पर आवंटन जरूरी है। प्रत्येक नगर निगम में एक समर्पित अर्बन फ्लडिंग सेल बनाया जाना चाहिए, जो ड्रेनेज, भूमि उपयोग और आपदा प्रबंधन के बीच समन्वय स्थापित करे।
तकनीक के साथ नागरिक भागीदारी भी जरूरी
GIS, सैटेलाइट इमेजरी और AI आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग से जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। कमांड सेंटर के माध्यम से ट्रैफिक प्रबंधन और राहत-बचाव कार्यों को तत्काल निर्देशित किया जा सकता है। वहीं नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नदी-नालों में कचरा न डालना और स्थानीय स्तर पर वर्षाजल को रोकने के उपाय अपनाना सामुदायिक जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।
लेख में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में नए शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य में होने वाली तीव्र बारिश को ध्यान में रखकर डिजाइन करना होगा। केंद्र और राज्यों की विभिन्न योजनाओं में बेहतर समन्वय स्थापित कर शहरी बाढ़ प्रबंधन को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू करने की जरूरत है।
गायकवाड के मुताबिक शहरों को बार-बार आने वाले ‘फ्लड ट्रैप’ से निकालकर जलवायु-सक्षम और लचीले शहर बनाने के लिए केवल बजट पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सही प्राथमिकता, नियमित रखरखाव, जवाबदेही, वैज्ञानिक नियोजन और प्रकृति के साथ संतुलन जरूरी है। यदि प्रशासन हर साल केवल जलभराव के बाद राहत और प्रतिक्रिया तक सीमित रहा, तो आने वाले वर्षों में समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके लिए दीर्घकालिक नीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई आवश्यक है।
— राजेंद्र रंजन गायकवाड :- बिलासपुर, छत्तीसगढ़




