
जिला शिक्षा अधिकारी पर शासन के प्रतीक चिन्ह के कथित अनधिकृत इस्तेमाल का आरोप, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
अंबिकापुर। जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा द्वारा कार्यालयीन आदेशों में छत्तीसगढ़ शासन के प्रतीक चिन्ह (लोगो) के कथित अनधिकृत उपयोग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर सरगुजा को शिकायत पत्र सौंपकर मामले में नियमानुसार जांच एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

11 अक्टूबर 2026 को अंबिकापुर से भेजे गए पत्र में परवेज आलम गांधी ने जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा द्वारा 24 एवं 25 सितंबर 2026 को जारी आदेशों का हवाला देते हुए दावा किया है कि इन कार्यालयीन आदेशों में छत्तीसगढ़ शासन के प्रतीक चिन्ह का उपयोग किया गया है। उन्होंने कलेक्टर से संलग्न आदेशों का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
राज्य प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर उठाया कानूनी सवाल
शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में भारत का राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियमन) नियम, 2007 तथा द स्टेट एम्ब्लम ऑफ इंडिया (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 का उल्लेख करते हुए राज्य प्रतीक के इस्तेमाल की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि निर्धारित नियमों के तहत राज्य प्रतीक का उपयोग अधिकृत संवैधानिक एवं शासकीय संस्थाओं तथा आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों तक सीमित है।

परवेज आलम गांधी ने आरोप लगाया है कि जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा अपने कार्यालयीन आदेशों पर राज्य प्रतीक का इस्तेमाल किया जाना नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी सक्षम स्तर पर जांच आवश्यक है। उन्होंने कलेक्टर से इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की है।
विभागीय कार्रवाई और अधिकार सीमा पर भी सवाल
शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार झा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि व्याख्याता पद पर कार्यरत शिक्षक-संवर्ग के एक कर्मचारी के विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उनकी अधिकार सीमा से आगे बढ़कर विभागीय जांच का आदेश पारित किया गया।

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने युक्तियुक्तकरण-2025 की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि प्रक्रिया समाप्त होने के लगभग एक वर्ष बाद भी लंबित प्रकरणों के निराकरण के नाम पर नगर के समीप स्थित शालाओं में प्रधान पाठक (प्राथमिक शाला) के रिक्त पदों के विरुद्ध सहायक शिक्षकों की पदस्थापनाएं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वयं की गई हैं।
जिला स्तरीय समायोजन के अधिकार पर भी आपत्ति
पत्र में दावा किया गया है कि युक्तियुक्तकरण-2025 में जिला स्तरीय शिक्षक समायोजन का अधिकार जिला समिति के अध्यक्ष सह कलेक्टर के पास था। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि ऐसी स्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वयं पदस्थापन संबंधी कार्रवाई किस अधिकार के तहत की गई।

परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर से मांग की है कि राज्य प्रतीक चिन्ह के कथित अनधिकृत उपयोग, विभागीय जांच के आदेश तथा शिक्षक पदस्थापन से जुड़े मामलों की जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

शिकायत पत्र के साथ जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी 24 एवं 25 सितंबर 2026 के आदेशों की छायाप्रतियां भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है।

मामले में लगाए गए आरोपों पर जिला शिक्षा अधिकारी या शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।





