
भारतेन्दु जयंती पर साहित्य-कला समिति का वार्षिकोत्सव
अम्बिकापुर। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जयंती के अवसर पर भारतेन्दु साहित्य-कला समिति का वार्षिकोत्सव एवं जयंती समारोह साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत वातावरण में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। स्टेडियम प्रांगण स्थित भारतेन्दु साहित्य-कला भवन में 9 सितम्बर को आयोजित कार्यक्रम में साहित्यिक विचार गोष्ठी, गीत-संगीत, नृत्य, पुस्तक विमोचन तथा सम्मान समारोह ने उपस्थित साहित्य एवं कला प्रेमियों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष श्रीमती नीलिमा मिश्रा एवं अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात हिन्दी साहित्य के युग प्रवर्तक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र तथा संस्था के संस्थापक स्व. पं. जीवन नाथ मिश्र के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में मनेन्द्रगढ़ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव मुख्य अतिथि, डॉ. सुदामा मिश्रा एवं राजेश मिश्रा विशिष्ट अतिथि तथा मूर्धन्य साहित्यकार बबन जी पाण्डेय अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संध्या सिंह ने किया।
भारतेन्दु हिन्दी नवजागरण के प्रमुख स्तंभ : वीरेंद्र श्रीवास्तव
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि भारतेन्दु काल हिन्दी गद्य की अनेक विधाओं के विकास का महत्वपूर्ण दौर रहा है। आज हिन्दी भारतीय बाजार और जनसंचार की प्रभावशाली भाषा बनने के साथ-साथ विदेशों में भी व्यापक रूप से बोली और समझी जा रही है। ऐसे समय में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के योगदान को हिन्दी के उत्थान का मील का पत्थर कहना उचित होगा।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुदामा मिश्रा ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को नवजागरण का पुरोधा, राष्ट्रीय चेतना का संवाहक और राष्ट्रप्रेमी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था। बलिया एवं प्रयाग में दिए गए उनके व्याख्यान भाषा के प्रति उनके प्रेम और राष्ट्रभक्ति का परिचायक हैं।
राजेश मिश्रा ने कहा कि यदि आधुनिक युग की शुरुआत 19वीं सदी से मानी जाती है तो आधुनिक हिन्दी के निर्माता के रूप में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को स्वीकार करना स्वाभाविक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार बबन जी पाण्डेय ने कहा कि भारतेन्दु हिन्दी साहित्य में युग प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी को संस्कृतनिष्ठ एवं उर्दू प्रभाव से निकालकर बोलचाल की भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय संस्कृति की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने तत्कालीन सामाजिक रूढ़ियों से मुक्ति का संदेश भी दिया।
वंदना दत्ता को मिला पं. जीवन नाथ मिश्र सम्मान
अतिथियों के उद्बोधन के पश्चात संस्था के संरक्षक-संयोजक द्वितेन्द्र मिश्र ने साहित्य और साहित्यकारों की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज के दर्पण की भूमिका निभाता है और सत्ता से सवाल करने के साथ ही विषम परिस्थितियों में तटस्थ रहकर समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करता है।
इसी अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं दिवंगत पूर्व अध्यक्ष स्व. पं. जीवन नाथ मिश्र (जे.एन. मिश्र) की स्मृति में दिए जाने वाले ‘पं. जीवन नाथ मिश्र स्मृति सम्मान-2026’ के लिए सरगुजा की प्रख्यात समाजसेविका सुश्री वंदना दत्ता के नाम की घोषणा की गई।
अतिथियों ने वंदना दत्ता को शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ, प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो के साथ 11 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती नीलिमा मिश्रा ने वंदना दत्ता के व्यक्तित्व एवं सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्हें समाज की धरोहर बताया और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
सम्मान से अभिभूत वंदना दत्ता ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके साथ जुड़े सभी सहयोगियों और समाज के लोगों के सहयोग का परिणाम है।
गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्थानीय संगीत विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षक डॉ. मानक टंडन के मार्गदर्शन में लोकगीत, भजन एवं अन्य सांगीतिक प्रस्तुतियां दीं। एक छात्रा ने तीजन बाई की शैली में महाभारत के एक प्रसंग की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। प्रेमानंद पातर ने भी भजन एवं गीत प्रस्तुत किए। वहीं गोधनपुर के रवि पाण्डेय ने शानदार गजलों की प्रस्तुति से दर्शक दीर्घा का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती संध्या सिंह ने किया तथा आभार प्रदर्शन समिति के सचिव डॉ. सुधीर पाठक ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, बुद्धिजीवी एवं साहित्य-कला प्रेमी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. पुष्पा सिंह, एम.एम. मेहता, हरिकिशन शर्मा, आर.डी. मिश्र, कन्हैया लाल गौड़, राम लोलार्क मिश्र, डॉ. राम कुमार मिश्र, देवेन्द्र दुबे, प्रभुनारायण वर्मा, वेद प्रकाश अग्रवाल, राजेश पाण्डेय, राजेश तिवारी, दुर्गा प्रसाद तिवारी, सच्चिदानंद पाण्डेय, रमेश सिन्हा, दुर्गेश द्विवेदी, संतोष कुमार, योगेश गुप्ता, नरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, आर.एच. श्रीवास्तव, जय प्रकाश चौबे, प्रताप पाण्डेय, देव चरण गुप्ता, अजित त्रिपाठी, जमगला से शिवब्रत पावले एवं अशोक जमगलिहा, राम नारायण सिंह, श्रीमती गूंजर मिंज, ओम प्रकाश तिवारी, जय गुप्ता, राकेश मिश्रा, राज नारायण द्विवेदी, मंगल पाण्डेय, अभय तिवारी, श्रीमती गीता दुबे, डॉ. शलभ दुबे ‘वीणा’, पूनम शुक्ला, राज लक्ष्मी पाण्डेय, माधुरी जायसवाल, शीरिल खान, अंजू पाण्डेय, नीतू मिश्रा, उपमा पाण्डेय, ममता मिश्रा, दीप मिश्रा, अंकित मिश्रा, विमला देवी, श्रीमती रूबी सिद्दीकी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं साहित्य-कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रीति भोज एवं शुभकामनाओं के साथ हुआ।




