पत्रकारिता बनाम पटवारी की कार्यप्रणाली : क्या व्यक्तिगत सीमाओं को लांघना ‘स्वस्थ पत्रकारिता’ है ? विशेष रिपोर्ट

पत्रकारिता बनाम पटवारी की कार्यप्रणाली : क्या व्यक्तिगत सीमाओं को लांघना ‘स्वस्थ पत्रकारिता’ है ? विशेष रिपोर्ट
अम्बिकापुर – लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार और मैदानी स्तर पर लोक प्रशासन का मुख्य चेहरा पटवारी, दोनों ही समाज और शासन – प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। दोनों की अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में स्पष्ट भूमिकाएं और जिम्मेदारियां तय हैं। जहाँ एक ओर पटवारी का काम राजस्व, भूमि रिकॉर्ड और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर पत्रकार का ध्येय शासन-प्रशासन की कमियों को उजागर कर जनहित में सच्चाई सामने लाना है।

परंतु, हाल के दिनों में पत्रकारिता की दिशा और दशा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं—विशेषकर तब, जब किसी व्यक्ति या शासकीय कर्मचारी के निजी जीवन को समाचार का विषय बना दिया जाता है।
कार्यक्षेत्रों का सम्मान और नैतिक सीमाएं :-
पटवारी का दायित्व : राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा, किसानों की समस्याओं का समाधान और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन। यदि किसी पटवारी द्वारा पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार या कार्य में लापरवाही बरती जाती है, तो उसे उजागर करना पूर्णतः जनहित में है।
पत्रकार का कर्तव्य : जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को बिना किसी भेदभाव के सामने लाना। हालांकि, शासकीय कर्मचारी का दायित्व उसके सार्वजनिक और पेशेवर आचरण तक सीमित होता है, न कि उसके व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक जीवन तक।
निजी जीवन पर प्रहार : स्वस्थ पत्रकारिता पर बड़ा सवाल – किसी शासकीय कर्मचारी या आम नागरिक के निजी जीवन, पारिवारिक मामलों या व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को चटपटी खबरें बनाकर प्रकाशित करना पत्रकारिता के उच्च आदर्शों के विपरीत है। जब तक किसी व्यक्ति का निजी कृत्य सीधे तौर पर उसके सार्वजनिक पद को प्रभावित न करे या किसी बड़े जनहित से न जुड़ा हो, तब तक उसे सार्वजनिक पटल पर लाना ‘पीत पत्रकारिता’ (Yellow Journalism) का रूप ले लेता है।
समाचार संपादक की टिप्पणी :- “पत्रकारिता का मूल उद्देश्य लोककल्याण और पारदर्शिता है, न कि किसी की निजता का हनन करना। व्यक्ति चाहे शासकीय सेवा में हो या आम नागरिक, उसकी निजता (Privacy) का सम्मान होना ही चाहिए। व्यक्तिगत मामलों को नामजद सनसनी बनाकर पेश करने से न केवल पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी चिंताजनक है।”
संतुलन की आवश्यकता – स्वस्थ पत्रकारिता वही है जो सार्वजनिक हित (Public Interest) और व्यक्तिगत जीवन (Private Life) के बीच के पतले धागे को समझे। यदि कोई समाचार शासकीय कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार या जनसमस्या से जुड़ा है, तो उसे पूरी प्रखरता से उठाया जाना चाहिए। किंतु जब कोई रिपोर्टिंग व्यक्तिगत चरित्र हनन या निजी रंजिश निकालने का माध्यम बनती है, तो समाज और मीडिया दोनों को इस पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।





