
E20 के नाम पर जल, खाद्य सुरक्षा और आम जनता की जेब से समझौता कर रही मोदी सरकार : परवेज़ आलम गांधी
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने E20 फ्यूल नीति को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए इसके पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार E20 को स्वच्छ ऊर्जा और तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, लेकिन इसके प्रभावों का आकलन जल संसाधन, खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले बोझ को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

परवेज़ गांधी ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने के दावे किए गए थे, लेकिन आम जनता को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में कमी की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं पर लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

उन्होंने कहा कि E20 के कारण माइलेज में कमी की शिकायतों के बीच वाहन मालिकों का खर्च बढ़ा है। यदि सरकार वास्तव में उपभोक्ताओं के हित में काम कर रही है तो ईंधन की कीमतों में उसी अनुपात में राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि E20 नीति का वास्तविक आर्थिक लाभ आम वाहन मालिकों को मिल रहा है या एथेनॉल उत्पादकों को?
जल संकट पर जताई चिंता
परवेज़ गांधी ने कहा कि भारत में एथेनॉल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा गन्ना, धान और मक्का जैसी पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भर है। उनके अनुसार उपलब्ध आकलनों में एक लीटर एथेनॉल के उत्पादन में गन्ने से करीब 3,630 लीटर, चावल से 10,790 लीटर और मक्के से लगभग 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता बताई गई है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्से पहले से भूजल संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पानी की अधिक खपत वाली फसलों को एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना जल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन के खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव को स्पष्ट करना चाहिए।
कृषि अवशेष से एथेनॉल उत्पादन पर जोर देने की मांग
परवेज़ गांधी ने कहा कि कृषि अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट से एथेनॉल उत्पादन के अधिक टिकाऊ विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि खाद्यान्न आधारित एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक ग्रीन फ्यूल नीति वही होगी, जिसमें ईंधन के उत्पादन से लेकर उसके उपयोग तक के पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव का निष्पक्ष आकलन किया जाए। जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित और आम उपभोक्ताओं की जेब की कीमत पर E20 को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण नहीं कहा जा सकता।
— परवेज़ आलम गांधी : प्रदेश महासचिव, छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग




