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अदालत ने कहा बेगुनाह, भाजपा ने पहले ही बुलडोजर से सुना दी सज़ा : परवेज़ आलम गांधी

अदालत ने कहा बेगुनाह, भाजपा ने पहले ही बुलडोजर से सुना दी सज़ा : परवेज़ आलम गांधी

अंबिकापुर। कांग्रेस नेता परवेज़ आलम गांधी ने मध्य प्रदेश के खरगोन बुलडोजर प्रकरण का उल्लेख करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथित “बुलडोजर राजनीति” कानून के शासन और संविधान की मूल भावना पर सीधा प्रहार है।

परवेज़ गांधी ने कहा कि 10 अप्रैल 2022 को खरगोन में शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने शहर के पाँच अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बुलडोजर चलाकर 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “जिस घर से पत्थर आए हैं, उस घर को ही पत्थरों का ढेर बनाएंगे।”

परवेज आलम गांधी

उन्होंने बताया कि 27 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के अपर सत्र न्यायालय ने इसी मामले में आरोपी सभी 11 मुस्लिम पुरुषों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ न कोई विश्वसनीय साक्ष्य था, न प्रत्यक्षदर्शी गवाह और न ही विधिसम्मत जांच की गई थी।

परवेज़ गांधी ने कहा कि अदालत ने जिन लोगों को निर्दोष माना, उन्हें भाजपा सरकार ने वर्षों पहले ही बुलडोजर चलाकर दंडित कर दिया था। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया से पहले सज़ा देने की मानसिकता करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई का उपयोग बार-बार अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया गया है। उनके अनुसार धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, दुकानों और मकानों को ध्वस्त कर संविधान के समानता, न्याय और विधि के शासन के सिद्धांतों को आघात पहुँचाया गया है।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि जिन नागरिकों के घर और दुकानें बिना निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के ध्वस्त किए गए और बाद में वे अदालत से निर्दोष साबित हुए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्णय लेने वालों की जवाबदेही भी तय की जाए।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में न्याय अदालतों से मिलता है, बुलडोजर से नहीं। यदि सरकारें अदालत से पहले ही सज़ा सुनाने लगें, तो संविधान और कानून का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।”

 

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